Rootha Na Karo
इस तसवीर को देख (Metaphor) कुछ लब्ज़ आस पास मंडराने लगे, पेश कर रहा हूं। इर्शाद कह दीजिए…
(Image Courtesy: Saanya - my daughter, from Tadoba Tiger Resort)
दहकता मौसम, सावन अभी दूर है, ऐसे में तेरा रूठना यह कैसा मंज़र है। रूठना तेरी अदा है, मै इसके आदी तेरे मेरे दरमियान यह कैसी खामोशी। कभी दिल दुखा हो कभी दर्द दिया हो समय की धारा में उमर बह जानी है। मुंह फेरे रहना माना अदा है तेरी मुड़ के देख इस तरफ, इल्तज़ा है मेरी। न चाहो देखना मेरी सूरत ही सही अपनी तो देख सुन्दरता इस पानी में सही। अगर मगर कि बात नहीं दिल की सच्चाई है समय की धारा है, उमर बीत जानी है। चलो भुल जाते है सारे गिले शिकवे एक साथ अपने को देखते है इस नहर में झूमने फिर मदहोश। ............. अशोक



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